॥ ॐ नमः शिवाय ॥
दोष रिपोर्ट (Dosha Report)
मंगल दोष (मांगलिक), काल सर्प दोष व शनि साढ़े साती — तीव्रता, कारण, शमन कारक एवं शास्त्रोक्त उपाय।
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सटीक दोष विश्लेषण के लिए सही जन्म समय व स्थान आवश्यक है।
दोष क्या हैं?
मंगल दोष (मांगलिक): जब मंगल लग्न, चंद्र या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो तो मांगलिक दोष बनता है। यह मुख्यतः विवाह व दांपत्य जीवन को प्रभावित करता है। मंगल की राशि, गुरु की दृष्टि व अन्य योग इसकी तीव्रता घटा सकते हैं।
काल सर्प दोष: जब सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही ओर आ जाएं तो काल सर्प दोष बनता है। राहु की भाव-स्थिति के अनुसार इसके 12 प्रकार (अनंत, कुलिक, वासुकि आदि) होते हैं।
शनि साढ़े साती: जब गोचर शनि जन्म चंद्र राशि से 12वें, उसी राशि व 2रे भाव से गुजरता है तो लगभग साढ़े सात वर्ष की साढ़े साती चलती है। 4थे/8वें भाव में शनि का गोचर 'ढैया' (लघु पनोती) कहलाता है।
अस्वीकरण: यह रिपोर्ट स्वचालित गणना पर आधारित है और शैक्षिक उद्देश्य हेतु है। दोषों की तीव्रता व निवारण कुंडली के अनेक कारकों पर निर्भर करता है। कोई भी उपाय करने से पूर्व योग्य पंडित जी से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य करें।
दोष निवारण व शांति पूजा चाहिए?
मंगल शांति, काल सर्प शांति व शनि शांति — पंडित जी से व्यक्तिगत परामर्श एवं शास्त्रोक्त अनुष्ठान